ख़त्म करो पूँजी का राज! लड़ो बनाओ लोकस्वराज्य!

ख़त्म करो पूँजी का राज! लड़ो बनाओ लोकस्वराज्य!

सात दशकों के आज़ाद भारत में किसे क्या मिला? किसकी कोठियाँ और बंगले खड़े हो गये और कौन मुफ़लिसी की ज़िन्दगी बिता रहा है? यह किसकी आज़ादी है? कौन हर स्वतन्त्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस पर आज़ादी का जश्न मना रहा है और कौन झुग्गी-बस्तियों और झोपड़ियों में अपने हालात का मातम मना रहा है?

शहीदे-आज़म भगतसिंह के 109 वें जन्मदिवस के अवसर पर ‘शहीद यादगारी यात्रा’

शहीदे-आज़म भगतसिंह के 109 वें जन्मदिवस के अवसर पर ‘शहीद यादगारी यात्रा’

 भगतसिंह का मानना था कि अंग्रेजों को देश से भगाने के साथ ही देशी लुटेरों को भी उखाड़ फेंकना होगा। ऐसा समाज बनाना होगा जिसमें एक आदमी द्वारा दूसरे आदमी का शोषण न हो, अमीरी-गरीबी की खाईं न हो, धर्म-जाति-क्षेत्र के नाम पर दंगे-फसाद न हों, स्त्री-पुरुष समानता हो, मेहनत करने वाले लोग रहने-खाने-पहनने सहित शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, मनोरंजन आदि की सुविधायें हासिल कर सकें। हर इंसान को गरिमा-सम्मान के साथ जीवन जीने का मौका मिले।

बिना क्रान्ति जाति उन्मूलन सम्भव नहीं! बिना जाति-विरोधी संघर्ष क्रान्ति सम्भव नहीं!

बिना क्रान्ति जाति उन्मूलन सम्भव नहीं! बिना जाति-विरोधी संघर्ष क्रान्ति सम्भव नहीं!

आज देश भर में मेहनतकश दलित आबादी भी संघी फासीवादियों के अत्याचारों के खिलाफ़ चुप नहीं बैठ रही है। उसने केवल संविधान और सरकार के भरोसे रहने, रियायतें माँगने और सुधारवाद के भरोसे रहना बन्द कर दिया है। गुजरात में मेहनतकश दलितों ने सम्मान और समानता के हक़ के लिए जो जंग छेड़ी है वह शानदार है। आज देश के मेहनतकश ग़रीब दलित मज़दूर और आम मेहनतकश यह समझ रहा है कि इंक़लाब के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

‘गौ-रक्षा दल’ द्वारा गुजरात में दलितों पर बर्बर अत्याचार के खिलाफ आव़ाज उठाओ!!

‘गौ-रक्षा दल’ द्वारा गुजरात में दलितों पर बर्बर अत्याचार के खिलाफ आव़ाज उठाओ!!

दलित युवाओं को पीटे जाने की इस घटना से यह साफ हो जाता है कि अगर आर.एस.एस. और भाजपा अपनी हिंदुत्ववादी फासीवादी एजेंंडे को लागू करने में पूरी तरह सफल हो गयी तो दलितों की जिन्दगी कैसी होगी। और यहाँ बात सिर्फ दलितों तक ही सीमित नहीं है। इसी तरह गोमांस की अफवाह फैलाकर अखलाक नाम के एक व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डालने वाले भी यही कट्टरपंथी ताकतें थी। ये फासीवाद हमेशा कमजोर तबकों के खिलाफ होता है, चाहे वे दलित हों, अल्पसंख्यक हों या महिलायें हों।

फिर चुनाव! बार-बार कब तक ठगे जायेंगे … उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (नौभास द्वारा जारी पर्चा)

फिर चुनाव! बार-बार कब तक ठगे जायेंगे … उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (नौभास द्वारा जारी पर्चा)

इतने सालों के इंतजार के बाद भी अगर हम चुनावी मदारियों के भरोसे बैठे रहे तो हम अपनी आने वाली पीढियों के लिए भुखमरी, बेरोजगारी, गरीबी का दलदल छोड़ जायेंगे। एक कब्रिस्तान छोड़ जायेंगे जहाँ चारों तरफ बस मुर्दा शान्ति होगी। अगर हम जीवित हैं, इंसाफपसंद हैं तो आइये! उठ खड़े हों! जाति-धर्म, क्षेत्र के झगड़े भुलाकर फौलादी एकता बनाएं और इन 15 फीसदी परजीवियों को धूल चटा दें।

कौन देशभक्त? कौन देशद्रोही? इतिहास के मिथ्याकरण के विरुद्ध!

कौन देशभक्त? कौन देशद्रोही? इतिहास के मिथ्याकरण के विरुद्ध!

आज हमारे लिए संघ-भाजपा के ‘राष्ट्रवाद’ और इसकी तथाकथित ‘देशभक्ति’ की असलियत को पहचानने की जरूरत है। और उसके साथ ही देश की आजादी के लिए शहीद होने वाले सच्चे ‘देशभक्तों’ की क्रान्तिकारी विरासत को जानने समझने की भी जरूरत है। हमें एक उन्मादी देश-भंजक भाजपा-संघी ‘राष्ट्रवाद’ नहीं बल्कि जनता के भाईचारे, आजादी और जनता के जनवादी अधिकारों वाले समाज की जरूरत है। आज हर एक इंसाफपसन्द नौजवान, नागरिक और स्त्री-पुरुष के लिए संघ-भाजपा के असल चेहरे को देखने की जरूरत है क्योंकि ये हमारी आँखों के सामने ही हर झूठ को सौ बार दोहरा कर सच बनाना चाहते हैं।

सावधान! सावधान! सावधान! ज़हरखुरानी गिरोह से सावधान!

सावधान! सावधान! सावधान! ज़हरखुरानी गिरोह से सावधान!

पहले इस गिरोह को चड्ढी गेंग या कच्छा-बनियान गिरोह नाम से जाना जाता था लेकिन विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि अब यह अपना चोला बदलने की फ़ि‍राक में है। हर ख़ासो-आम को आगाह किया जाता है कि नई पैकिंग से धोखा न खायें क्योंकि अन्‍दर का माल वही है।

मानखुर्द, गोवण्डी से लगातार गायब हो रहे बच्चे

मानखुर्द, गोवण्डी से लगातार गायब हो रहे बच्चे

मानव अंगों के विश्वव्यापी व्यापार, चाइल्ड पोर्नोग्राफी और बाल वेश्यावृत्ती के फैलते धंधे और बच्चों को अगवा कर उनसे भीख मंगवाने, बंधुआ मजदुरी कराने या घरेलु नौकर के रूप में बेच देने वाले गिरोह आज पुरे देश स्तर पर सक्रिय हैं। अगर हम गरीब मेहनतकश लोग जिनके बच्‍चों को ये गिरोह निशाना बनाते हैं, खुद खड़े नहीं होंगे तो हमारी सहायता करने कोई नहीं आने वाला।

नौजवानों से दो बातें

नौजवानों से दो बातें

आज मैं नौजवानों को सम्बोधित करना चाहता हूं। बूढ़े इस पैम्फ़लेट को रख दें और ऐसी बातें पढ़कर अपनी आंखें न दुखायें जो उन्हें कुछ भी नहीं देंगी। जाहिर है बूढ़ों से मेरा मतलब उनसे है जो दिल और दिमाग से बूढ़े हैं। मैं यह मानकर चल रहा हूं कि आप अठारह या बीस वर्ष की उम्र के हैं; कि आपने अपनी अप्रेण्टिसशिप या पढ़ाई पूरी कर ली है; कि आप जीवन में बस प्रवेश कर रहे हैं। मैं यह मानकर चलता हूं कि आपका दिमाग उस अंधविश्वास से मुक्त है जो आपके अध्यापक आप पर थोपने की कोशिश करते रहे; कि आप शैतान से नहीं डरते, और आप पादरियों और धर्माचार्यों की अनाप-शनाप बातें सुनने नहीं जाते। इसके साथ ही, आप उन सजे-धजे छैलों, एक सड़ रहे समाज के उन उत्पादों में से नहीं हैं जिन्हें देखकर अफ़सोस होता है, जो अपनी बढ़िया काट की पतलूनों और बंदर जैसे चेहरे लिये पार्कों में घूमते-फि़रते हैं और जिनके पास इस कम उम्र में ही सिर्फ़ एक ही चाहत होती है किसी भी कीमत पर मौज-मस्ती लूटने की कभी न बुझने वाली चाहत।… इसके उलट, मैं यह मानता हूं कि आपके सीनों में गर्मजोशी से भरा एक दिल धड़कता है और इसीलिए मैं आपसे बात कर रहा हूं।

वज़ीरपुर के बच्चों के लिए शहीद भगत सिंह पुस्तकालय द्वारा आयोजित की गयी पेंटिंग कार्यशाला!

वज़ीरपुर के बच्चों के लिए शहीद भगत सिंह पुस्तकालय द्वारा आयोजित की गयी पेंटिंग कार्यशाला!

वज़ीरपुर के बच्चों के लिए शहीद भगत सिंह पुस्तकालय द्वारा आयोजित की गयी पेंटिंग कार्यशाला! गत रविवार 8 मई 2016 के दिन वज़ीरपुर के बच्चों के लिए शहीद भगत सिंह पुस्तकालय द्वारा पेंटिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया। बच्चों ने इस कार्यशाला में बड़े उत्साह ने हिस्सा लिया। रंगों के साथ अपनी कल्पना से उन्होंने ने तरह तरह के चित्र बनाए।उन्होंने सफ़ेद कागज़ को अपने कल्‍पना के रंगों से रंगा, इस पूरी कार्यशाला के दौरान बच्चों का उत्साह और ख़ुशी देखते ही बनता था। सबने अपने अपने चित्रों के साथ बेहद…