महाविद्रोही राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिवस (9 अप्रैल) व पुण्यतिथि (14 अप्रैल) पर

महाविद्रोही राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिवस (9 अप्रैल) व पुण्यतिथि (14 अप्रैल) पर

आज जब सर्वग्रासी संकट से ग्रस्त हमारा समाज गहरी निराशा, गतिरोध और जड़ता के अँधेरे गर्त में पड़ा हुआ है, जहाँ पुरातनपंथी मूल्यों-मान्यताओं और रूढ़ियों के कीड़े बिलबिला रहे हैं, तो राहुल सांकृत्यायन का उग्र रूढ़िभंजक, साहसिक और आवेगमय प्रयोगधर्मा व्यक्तित्व प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आता है। आज जिस नये क्रान्तिकारी पुनर्जागरण और प्रबोधन की ज़रूरत है, उसकी तैयारी करते हुए राहुल जैसे इतिहास-पुरुष का व्यक्तित्व हमारे मानस को सर्वाधिक आन्दोलित करता है।

जातिअंत का रास्‍ता सुधारवाद, संविधानवाद नहीं बल्कि क्रांतिकारी वर्गीय एकजुटता है

जातिअंत का रास्‍ता सुधारवाद, संविधानवाद नहीं बल्कि क्रांतिकारी वर्गीय एकजुटता है

सभी जातियों के गरीबों को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। निश्चित रूप से ये रास्‍ता आसान नहीं है। अगर आसान होता तो अब तक सभी जातियों के गरीब अपने आप ही एकजुट हो जाते और तब जाति व्‍यवस्‍था खत्‍म हो जाती। हजारों सालों से भारत में जाति व्‍यवस्‍था है और ऐसे में थोड़े से प्रचार से गरीब साथ नहीं आ जायेंगे पर ये भी सच है कि इसके अलावा ओर कोई रास्‍ता नहीं है।