शहीदों के जो ख़्वाब अधूरे, इसी सदी में होंगे पूरे!

शहीदों के जो ख़्वाब अधूरे, इसी सदी में होंगे पूरे!

भगतसिंह का सपना केवल अंग्रेजों को देश से भगाना नहीं था। बल्कि उनका सपना हज़ारों साल से चली आ रही अमीरी व गरीबी की व्यवस्था को इतिहास के कूड़ेदान में फेंककर समता और न्याय पर आधारित समाज बनाकर एक नये युग का सूत्रपात करना था। 1930 में ही भगतसिंह ने कहा था कि हम एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान व एक देश द्वारा दूसरे देश के शोषण के ख़िलाफ़ हैं। कांग्रेस व गाँधी के वर्ग-चरित्र और धनिकों व भूस्वामियों पर उनकी निर्भरता को देखते हुए भगतसिंह ने चेतावनी दी थी कि इनका मक़सद लूटने की ताक़त गोरों के हाथ से लेकर मुट्ठी भर भारतीय लुटेरों के हाथ में सौंपना है।