आम मेहनतकश आबादी के स्‍वास्‍थ्‍य का पंचनामा और मोदी-योगी की जुमलेबाजी का नंगा सच

आम मेहनतकश आबादी के स्‍वास्‍थ्‍य का पंचनामा और  मोदी-योगी की जुमलेबाजी का नंगा सच

आज सारी स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली ही बीमार है। भारतीय संविधान का भाग 3, अनुच्‍छेद 21 ‘जीने का अधिकार’ तो देता है पर जीने की पूर्वशर्त यानि अन्‍न, वस्‍त्र, मकान, स्‍वास्‍थ्‍य व शिक्षा की जवाबदेही से हाथ खीच लेता है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के नाम पर अब स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का भी निजीकरण किया जा रहा है। नतीजतन स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं महंगी होती जा रही हैं। एक तरफ 1 प्रतिशत अमीरों के पास भारत की 58 प्रतिशत संपत्ति इकट्ठी हो गयी है व अनाज के मामले में आत्‍मनिर्भर होने की बात की जा रही है वहीं दूसरी तरफ 5000 बच्‍चे हर दिन भूख व कुपोषण के कारण मर जाते हैं। मुनाफे की इस व्‍यवस्‍था यानि पूँजीवाद में हर चीज बाजार में बिकती है। इसके लिए मेहनतकश आम जनता की जान भी लेनी पड़े तो इस व्‍यवस्‍था को हर्ज नहीं है। गोरखपुर की घटना से ये एकदम स्‍पष्‍ट हो रहा है।

युवा और संवेदनशील डॉक्टरों के नाम

युवा और संवेदनशील डॉक्टरों के नाम

हमारी यह अपील उन युवा दिलों से है जो अभी घाघ और दुनियादार नहीं बने हैं। जो बेरहम-धनलोलुपों की जमात में दिल से शामिल नहीं हुए हैं। जिनके अन्दर मनुष्यता बची है और जो अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए तैयार हैं। यदि आप सोचते हैं कि इस दिशा में सार्थक सामूहिक कोशिश की जानी चाहिए तो हमसे ज़रूर सम्पर्क कीजिये।

To the Young and Sensitive Doctors

To the Young and Sensitive Doctors

This appeal is addressed to all the young hearts who have not become shrewd and worldly wise. Who have not joined the ranks of cruel moneybags. Who still have humanity in their hearts and are ready to raise their voice against injustice. If you think a meaningful collective effort must be made in this direction, do not hesitate to contact us.