गौरक्षा के नाम पर मानव हत्‍याएं, जनसेवा के नाम पर अडानी-अम्‍बानी की सेवा – यही है फासीवादी संघी सरकार का असली चेहरा

गौरक्षा के नाम पर मानव हत्‍याएं, जनसेवा के नाम पर अडानी-अम्‍बानी की सेवा – यही है फासीवादी संघी सरकार का असली चेहरा

पूरे देश में संघ परिवार (आरएसएस) से जुड़े संगठनों ने पिछले लम्‍बे समय से गौरक्षा दल खड़े किये हैं जिनका एकमात्र उद्देश्‍य गाय के नाम पर भारत की जनता का साम्‍प्रदायिकीकरण करना है। इनके आतंक की वजह से बहुत सारी जगहों पर किसानों ने गाय खरीदना छोड़कर भैंस खरीदना शुरू कर दिया है क्‍योंकि ये घर के लिए दुधारू गाय ले जाते किसानों को भी पकड़कर मारते हैं। यहां तक कि मरे पशुओं का खाल उतारने वाले दलितों को भी मारते हैं। 2 अगस्‍त 2014 को दिल्‍ली में शंकर कुमार को इन्‍होंने जान से मार दिया था। शंकर कुमार दिल्‍ली महानगरपालिका की उस कॉण्‍ट्रेक्‍टर कम्‍पनी का कर्मचारी था जिसका काम मरे हुए पशु उठाना था।

शहीदों के जो ख़्वाब अधूरे, इसी सदी में होंगे पूरे!

शहीदों के जो ख़्वाब अधूरे, इसी सदी में होंगे पूरे!

भगतसिंह का सपना केवल अंग्रेजों को देश से भगाना नहीं था। बल्कि उनका सपना हज़ारों साल से चली आ रही अमीरी व गरीबी की व्यवस्था को इतिहास के कूड़ेदान में फेंककर समता और न्याय पर आधारित समाज बनाकर एक नये युग का सूत्रपात करना था। 1930 में ही भगतसिंह ने कहा था कि हम एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान व एक देश द्वारा दूसरे देश के शोषण के ख़िलाफ़ हैं। कांग्रेस व गाँधी के वर्ग-चरित्र और धनिकों व भूस्वामियों पर उनकी निर्भरता को देखते हुए भगतसिंह ने चेतावनी दी थी कि इनका मक़सद लूटने की ताक़त गोरों के हाथ से लेकर मुट्ठी भर भारतीय लुटेरों के हाथ में सौंपना है।

कौन देशभक्त? कौन देशद्रोही? इतिहास के मिथ्याकरण के विरुद्ध!

कौन देशभक्त? कौन देशद्रोही? इतिहास के मिथ्याकरण के विरुद्ध!

आज हमारे लिए संघ-भाजपा के ‘राष्ट्रवाद’ और इसकी तथाकथित ‘देशभक्ति’ की असलियत को पहचानने की जरूरत है। और उसके साथ ही देश की आजादी के लिए शहीद होने वाले सच्चे ‘देशभक्तों’ की क्रान्तिकारी विरासत को जानने समझने की भी जरूरत है। हमें एक उन्मादी देश-भंजक भाजपा-संघी ‘राष्ट्रवाद’ नहीं बल्कि जनता के भाईचारे, आजादी और जनता के जनवादी अधिकारों वाले समाज की जरूरत है। आज हर एक इंसाफपसन्द नौजवान, नागरिक और स्त्री-पुरुष के लिए संघ-भाजपा के असल चेहरे को देखने की जरूरत है क्योंकि ये हमारी आँखों के सामने ही हर झूठ को सौ बार दोहरा कर सच बनाना चाहते हैं।

सावधान! सावधान! सावधान! ज़हरखुरानी गिरोह से सावधान!

सावधान! सावधान! सावधान! ज़हरखुरानी गिरोह से सावधान!

पहले इस गिरोह को चड्ढी गेंग या कच्छा-बनियान गिरोह नाम से जाना जाता था लेकिन विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि अब यह अपना चोला बदलने की फ़ि‍राक में है। हर ख़ासो-आम को आगाह किया जाता है कि नई पैकिंग से धोखा न खायें क्योंकि अन्‍दर का माल वही है।

भागो नहीं, दुनिया को बदलो! – राहुल सांकृत्यायन की जन्मतिथि व पुण्यतिथि के अवसर पर अभियान

भागो नहीं, दुनिया को बदलो! – राहुल सांकृत्यायन की जन्मतिथि व पुण्यतिथि के अवसर पर अभियान

हम जनता के सच्चे, बहादुर सपूतों का आह्वान करते हैं कि वे राहुल और भगतसिंह के सपनों के भारत के निर्माण के लिए आगे आयें। अब और देर आत्मघाती होगी। या तो पूँजी की सर्वग्रासी गुलामी से मुक्ति या फिर फासीवादी बर्बरता और विनाश- हमारे सामने सिर्फ ये ही दो विकल्प हैं। हम तमाम जिन्दा लोगों का आह्वान करते हैं।

सच्चे देशभक्तों को याद करो! नकली “देशभक्तों” की असलियत को पहचानो!

सच्चे देशभक्तों को याद करो! नकली “देशभक्तों” की असलियत को पहचानो!

इस नफ़रत की सोच से अलग हटकर, ठहरकर एक बार सोचिये कि 2 लाख करोड़ रुपये का व्यापम घोटाला करने वाले, घोटाले के 50 गवाहों की हत्याएँ करवाने वाले, विधानसभा में बैठकर पोर्न वीडियो देखने वाले, विजय माल्या और ललित मोदी जैसों को देश से भगाने में मदद करने वाले देशभक्ति और राष्ट्रवाद का ढोंग करके आपकी जेब पर डाका और घर में सेंध तो नहीं लगा रहे? कहीं ये ‘बाँटो और राज करो’ की अंग्रेज़ों की नीति हमारे ऊपर तो नहीं लागू कर रहे ताकि हम अपने असली दुश्मनों को पहचान कर, जाति-धर्म के झगड़े छोड़कर एकजुट न हो जाएँ? सोचिये साथियो, वरना कल बहुत देर हो जायेगी! जो आग ये लगा रहे हैं, उसमें हमारे घर, हमारे लोग भी झुलसेंगे। इसलिए सोचिये!

ATS and police raid for distributing anti-RSS pamphlets

ATS and police raid for distributing anti-RSS pamphlets

Naujawan Bharat Sabha is commited to carry forward the legacy of the great revolutionaries and therefore,has been continuously waging struggle against the hateful propaganda of the communal groups.Precisely,because of this, the members of this organisation have been getting continuous threats from such groups. A few days back the activists of NBS had distributed some pamphlets (Pamphlet link – http://naubhas.in/archives/445) in the locality exposing the current political scenario. On the night of March 22, Mumbai Police cracked-down at Naujawan Bharat Sabha’s office in Lallubhai Compound, Mankhurd, Mumai. The three policemen forced the activists to open the gate and started interrogating.

जेएनयू-विरोधी गोलबन्दी की आरएसएस की साज़ि‍शाना मुहिम

जेएनयू-विरोधी गोलबन्दी की आरएसएस की साज़ि‍शाना मुहिम
आरएसएस के लोगों द्वारा संचालित ”सर्वप्रथम भारत” नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप से मिले कई संदेशों से पता चला है कि दिल्ली के होलंबी कलां, मेट्रो विहार, बवाना, अलीपुर आदि इलाकों में लगातार मीटिंगें करके ज़हरीला प्रचार चलाया जा रहा है और 21 फरवरी को जेएनयू पर बड़ी संख्या में लोगों को बसों-ट्रकों में भरकर ले जाने की योजना है। इन्‍हीं में से एक व्‍हाट्सऐप मैसेज से यह भी सामने आ गया है कि जेएनयू के आसपास के इलाकों में आरएसएस की शह पर मकानमालिक जेएनयू के छात्र-छात्राओं को कमरों से निकाल बाहर कर रहे हैं।

कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही?

कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही?

अगर हम आज ही हिटलर के अनुयायियों की असलियत नहीं पहचानते और इनके ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाते तो कल बहुत देर हो जायेगी। हर जुबान पर ताला लग जायेगा। देश में महँगाई, बेरोज़गारी और ग़रीबी का जो आलम है, ज़ाहिर है हममें से हर उस इंसान को कल अपने हक़ की आवाज़ उठानी पड़ेगी जो चाँदी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ है। ऐसे में हर किसी को ये सरकार और उसके संरक्षण में काम करने वाली गुण्डावाहिनियाँ“देशद्रोही” घोषित कर देंगी! सोचिये दोस्तो और आवाज़ उठाइये, इससे पहले कि बहुत देर हो जाये।

जेएनयू पर फासीवादी हमला नहीं सहेंगे! भगवा ब्रिगेड की साज़िशें नहीं चलेंगी!

जेएनयू पर फासीवादी हमला नहीं सहेंगे! भगवा ब्रिगेड की साज़िशें नहीं चलेंगी!

दक्षिणपंथी छात्र संगठन के गुण्डों-लम्पटों और साथ ही कुछ ग़ैर-ज़िम्मेदार परिधिगत अराजकतावादियों की हरक़तों के कारण पूरे जेएनयू को ‘राष्ट्रद्रोहियों का गढ़’, ‘देशद्रोहियों का प्रशिक्षण केन्द्र’ आदि घोषित किया जा रहा है। जेएनयू के प्रगतिशील छात्र आन्दोलन को न सिर्फ़ इन भगवा तत्वों को बेनक़ाब करना चाहिए वहीं ऐसे तमाम लम्पट अराजकतावादी तत्वों को भी किनारे करना चाहिए जो कि समूचे छात्र आन्दोलन को उसके एजेण्डे से भटका रहे हैं और साम्प्रदायिक फासीवादियों को यह मौका दे रहे हैं कि वे पूरे देश में इस संस्था को बदनाम कर सकें। हमारी लड़ाई यहाँ से सिर्फ़ शुरू होती है कि हम जेएनयू पर फासीवादियों के मौजूदा हमले को नाकामयाब कर दें। लेकिन इसके बाद देश के आम जनसमुदायों में भी हमें इस हमले की पोल खोलनी होगी। कारण यह कि अगर हम लोगों के बीच नहीं जायेंगे तो भगवा ब्रिगेड जायेगी। और जेएनयू इस शहर और इस समाज का अंग है। हमें समाज में भगवा ताक़तों द्वारा जेएनयू की घेराबन्दी का अवसर नहीं देना चाहिए और शहर भर में, बल्कि देश भर में व्यापक प्रचार अभियान के ज़रिये ‘हिटलर के तम्बू’ में बैठे इन फासीवादियों की साज़िशों को बेनक़ाब करना चाहिए।