गौरक्षा के नाम पर मानव हत्‍याएं, जनसेवा के नाम पर अडानी-अम्‍बानी की सेवा – यही है फासीवादी संघी सरकार का असली चेहरा

गौरक्षा के नाम पर मानव हत्‍याएं, जनसेवा के नाम पर अडानी-अम्‍बानी की सेवा – यही है फासीवादी संघी सरकार का असली चेहरा

पूरे देश में संघ परिवार (आरएसएस) से जुड़े संगठनों ने पिछले लम्‍बे समय से गौरक्षा दल खड़े किये हैं जिनका एकमात्र उद्देश्‍य गाय के नाम पर भारत की जनता का साम्‍प्रदायिकीकरण करना है। इनके आतंक की वजह से बहुत सारी जगहों पर किसानों ने गाय खरीदना छोड़कर भैंस खरीदना शुरू कर दिया है क्‍योंकि ये घर के लिए दुधारू गाय ले जाते किसानों को भी पकड़कर मारते हैं। यहां तक कि मरे पशुओं का खाल उतारने वाले दलितों को भी मारते हैं। 2 अगस्‍त 2014 को दिल्‍ली में शंकर कुमार को इन्‍होंने जान से मार दिया था। शंकर कुमार दिल्‍ली महानगरपालिका की उस कॉण्‍ट्रेक्‍टर कम्‍पनी का कर्मचारी था जिसका काम मरे हुए पशु उठाना था।

महाविद्रोही राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिवस (9 अप्रैल) व पुण्यतिथि (14 अप्रैल) पर

महाविद्रोही राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिवस (9 अप्रैल) व पुण्यतिथि (14 अप्रैल) पर

आज जब सर्वग्रासी संकट से ग्रस्त हमारा समाज गहरी निराशा, गतिरोध और जड़ता के अँधेरे गर्त में पड़ा हुआ है, जहाँ पुरातनपंथी मूल्यों-मान्यताओं और रूढ़ियों के कीड़े बिलबिला रहे हैं, तो राहुल सांकृत्यायन का उग्र रूढ़िभंजक, साहसिक और आवेगमय प्रयोगधर्मा व्यक्तित्व प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आता है। आज जिस नये क्रान्तिकारी पुनर्जागरण और प्रबोधन की ज़रूरत है, उसकी तैयारी करते हुए राहुल जैसे इतिहास-पुरुष का व्यक्तित्व हमारे मानस को सर्वाधिक आन्दोलित करता है।

जातिअंत का रास्‍ता सुधारवाद, संविधानवाद नहीं बल्कि क्रांतिकारी वर्गीय एकजुटता है

जातिअंत का रास्‍ता सुधारवाद, संविधानवाद नहीं बल्कि क्रांतिकारी वर्गीय एकजुटता है

सभी जातियों के गरीबों को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। निश्चित रूप से ये रास्‍ता आसान नहीं है। अगर आसान होता तो अब तक सभी जातियों के गरीब अपने आप ही एकजुट हो जाते और तब जाति व्‍यवस्‍था खत्‍म हो जाती। हजारों सालों से भारत में जाति व्‍यवस्‍था है और ऐसे में थोड़े से प्रचार से गरीब साथ नहीं आ जायेंगे पर ये भी सच है कि इसके अलावा ओर कोई रास्‍ता नहीं है।

शहीदों के जो ख़्वाब अधूरे, इसी सदी में होंगे पूरे!

शहीदों के जो ख़्वाब अधूरे, इसी सदी में होंगे पूरे!

भगतसिंह का सपना केवल अंग्रेजों को देश से भगाना नहीं था। बल्कि उनका सपना हज़ारों साल से चली आ रही अमीरी व गरीबी की व्यवस्था को इतिहास के कूड़ेदान में फेंककर समता और न्याय पर आधारित समाज बनाकर एक नये युग का सूत्रपात करना था। 1930 में ही भगतसिंह ने कहा था कि हम एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान व एक देश द्वारा दूसरे देश के शोषण के ख़िलाफ़ हैं। कांग्रेस व गाँधी के वर्ग-चरित्र और धनिकों व भूस्वामियों पर उनकी निर्भरता को देखते हुए भगतसिंह ने चेतावनी दी थी कि इनका मक़सद लूटने की ताक़त गोरों के हाथ से लेकर मुट्ठी भर भारतीय लुटेरों के हाथ में सौंपना है।

अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस–चुप रहना छोड़ दो! गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ दो!!

अन्तरराष्ट्रीय स्त्री दिवस–चुप रहना छोड़ दो! गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ दो!!

आज के दौर में भी स्त्रियों के सामाजिक हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। स्त्री-विरोधी अपराधों का ग्राफ़ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। देश के किसी न किसी कोने से बलात्कार, एसिड हमले, दहेज के लिए हत्या और छेड़छाड़ के रूप में आये दिन भारतीय समाज की घृणित मर्दवादी मानसिकता की अभिव्यक्ति ख़बरों में आती रहती है। अभी हाल ही में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के छात्रावास में रहने वाली छात्राओं के माँसाहार पर रोक लगाना, रात 8 बजे तक हॉस्टल में वापस आना और रात नौ बजे के बाद मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होने जैसे ऊल-जलूल नियम बनाये गये है। जबकि ऐसी कोई भी रोक छात्रों के लिए नहीं है। जब इन छात्राओं ने इसका विरोध किया तो इन्हें डराया-धमकाया जा रहा है।

सावित्रीबाई फुले की लड़ाई आगे बढ़ाओ, नई शिक्षाबन्‍दी के विरोध में नि:शुल्‍क शिक्षा के लिए एकजुट हों!

सावित्रीबाई फुले की लड़ाई आगे बढ़ाओ, नई शिक्षाबन्‍दी के विरोध में नि:शुल्‍क शिक्षा के लिए एकजुट हों!

सावित्रीबाई ने पहले खुद सिखा व सामाजिक सवालों पर एक क्रांतिकारी अवस्थिति ली। ज्‍योतिबा की मृत्‍यु की बाद भी वो अंतिम सांस तक जनता की सेवा करती रहीं। उनकी मृत्‍यु प्‍लेगग्रस्‍त लोगों की सेवा करते हुए हुई। अपना सम्‍पूर्ण जीवन मेहनतकशों, दलितों व स्त्रियों के लिए कुर्बान कर देने वाली ऐसी जुझारू महिला को नौजवान भारत सभा की तरफ से हम क्रांतिकारी सलाम करते हैं व उनके सपनों को आगे ले जाने का संकल्‍प लेते हैं।

मनुस्‍मृति दहन की 89वीं वर्षगांठ पर – जाति उन्‍मूलन आन्‍दोलन को प्रतीकवाद, सुधारवाद और अर्जियां देने से आगे ले जाने का संकल्‍प लो!

मनुस्‍मृति दहन की 89वीं वर्षगांठ पर – जाति उन्‍मूलन आन्‍दोलन को प्रतीकवाद, सुधारवाद और अर्जियां देने से आगे ले जाने का संकल्‍प लो!

आज हम जिस मुकाम पर खड़े हैं वहां केवल प्रतीकात्‍मक कदमों से काम नहीं चल सकता। आज दलितों के सम्‍मान के लिए भी सिर्फ अरजि़यां देने, मुकदमे लड़ने और सरकारों को ज्ञापन देने से ज्‍यादा कुछ नहीं होने वाला है और सड़कों पर उतरकर लड़ने की जरूरत है। क्‍या अदालतों में ग़रीब दलित आबादी के लिए न्‍याय है? क्‍या बथानी टोला, लक्ष्‍मणपुर बाथे के हत्‍यारों को सज़ा मिली? क्‍या दलित विरोधी उत्‍पीड़न में कानूनों, मुकदमों और अर्जियों से कोई कमी आयी है? क्‍या अस्मितावादी राजनीति करने वाले तथाकथित दलित चुनावी और गैर-चुनावी दल वोट बैंक और प्रतीकात्‍मक मुद्दों से आगे जाते हैं? नहीं।

नोटबन्दी, काला धन और परेशानहाल जनता – सोचने के लिए कुछ सवाल, जानने की कुछ बातें

नोटबन्दी, काला धन और परेशानहाल जनता – सोचने के लिए कुछ सवाल, जानने की कुछ बातें

नोटबंदी से असली काला धन वाले कारोबारियों को ना तो कुछ नुकसान होने वाला है ना ही इनका काले धन का चोरी का कारोबार रुकने वाला है। अगर इनके पास तात्कालिक ज़रूरत के लिए कुछ नोट इकठ्ठा हों भी तो भी राजनेताओं, अफ़सरों, पुलिस, वित्तीय व्यवस्था में इनका रुतबा और पहुँच इतनी गहरी है कि उन्हें खपाने में इन्हें कोई ख़ास दिक्कत नहीं आयेगी। भारत की 84 प्रतिशत सम्पत्ति के मालिक सिर्फ 20 प्रतिशत लोग हैं जबकि शेष 80 प्रतिशत के पास सिर्फ़ 16 प्रतिशत सम्पत्ति है। क्या 20 प्रतिशत अमीर लोगों के बजाय इन 80 प्रतिशत ग़रीबों के पास काला धन है? लेकिन इन 80 प्रतिशत लोगों की आमदनी नकदी में है, इनके पास 500 या 1000 के नोट भी हैं और अब इन्हें इनको बदलने में सिर्फ़ तकलीफ़ ही नहीं उठानी पड़ रही बल्कि इन्हें लूटा भी जा रहा है।

क्रान्तिकारी जनजागरूकता-जनएकजुटता सप्ताह – अशफ़ाक उल्ला खाँ अमर रहें! गणेशशंकर विद्यार्थी अमर रहें!! यतीन्द्रनाथ दास अमर रहें!!!

क्रान्तिकारी जनजागरूकता-जनएकजुटता सप्ताह – अशफ़ाक उल्ला खाँ अमर रहें! गणेशशंकर विद्यार्थी अमर रहें!! यतीन्द्रनाथ दास अमर रहें!!!

इन शहीदों को याद करना हमारे लिए आज मौजूदा लूट व अन्याय पर टिकी व्यवस्था के खिलाफ एक नए क्रान्तिकारी आन्दोलन को शुरू करने का ऐलान है। युवाओं को तमाम भ्रष्ट चुनावी पार्टियों व धार्मिक कट्टरपन्थी संगठनों का झन्डा धूल में फेंक देना चाहिए और ‘समान शिक्षा-सबको रोजगार’ का झन्डा अपने हाथ में उठा लेना चाहिए। पानी, बिजली, स्वास्थ्य आदि के मुद्दे पर आम जनता को गोलबन्द करना चाहिए। बेहतर विचारों, बेहतर आदर्शों को खुद आत्मसात करना चाहिए व देश के एक-एक इंसान तक पहुँचाने की मुहिम में जुट जाना चाहिए। अपने शहीदों के समता व न्याय पर टिके समाज के सपने को पूरा करने के लिए मैदान में उतर जाने के लिए यह परचा तमाम युवाओं को एक आमंत्रण है। क्या आप तैयार हैं?

नौभास का प्रथम जिलास्तरीय सम्मेलन (जिला-सिरसा)

नौभास का प्रथम जिलास्तरीय सम्मेलन (जिला-सिरसा)

सम्मेलन में जिले की नई नेतृत्व कमेटी का चुनाव किया गया तथा पदाधिकारी चुने गए। नौ.भा.स की जिला सिरसा की अलग-अलग ईकाईयों में से कुल 80 प्रतिनिधि उपस्थित थे। इसी मौके पावेल (कालांवाली), दिलबाग सिंह(नकोड़ा), वकील सिंह (रोड़ी), सतपाल सिंह (औढाँ) तथा अमनदीप सिंह (संतनगर) को नई जिला कमेटी के सदस्यों के तौर पर चुना गया। जिला कमेटी ने सेक्रेटरी की भूमिका पावेल तथा कोषाध्यक्ष की भूमिका अमनदीप को सौंपी।