भगतसिह – सम्पादक ‘महारथी’ के नाम पत्र

सम्पादक महारथीके नाम पत्र

शहनशाही कुटिया
सूत मण्डी, लाहौर
27.2.1928

सम्पादक जी, सादर वन्दे!

आपका 17.2.1928 का कृपा पत्र व ‘महारथी’ के फ़रवरी अंक की एक प्रति भी समय से मिल गयी थी। इसके लिए मेरा हृदय से आभार स्वीकार करें। आपने गुरु राम सिंह जी का तीन रंगों वाले चित्र का फ़ोटो बनवाया या नहीं। मुझे यहाँ पता लगा कि फ़ोटो तो कम से कम आपने अभी प्रकाशित नहीं किया। मैं समझता हूँ कि चित्रों के बग़ैर इन लेखों की महानता कम हो जाती है। बाक़ी, लेख जो जल्दी ही आपकी सेवा में भेजूँगा, सचित्र ही छपने चाहिए। बहुतों के तो ब्लॉक बने हुए ही मिल सकेंगे। उनका डाक ख़र्च व कुछ माया ही देनी होगी। यदि आप उचित समझो तो लिखें, मैं प्रबन्ध करवा दूँगा। अभी गुरु राम सिंह जी की एक और फ़ोटो भेज रहा हूँ। एक सज्जन कह रहे थे कि ब्लॉक उनके पास है। यदि आप चाहो तो वे भी छपवाकर भेज सकते हैं। कृपा करके यह लिखें कि कितनी फ़ोटोज़ की ज़रूरत होगी। यह तो ‘महारथी’ की कुल संख्या पर निर्भर करता है।

लेख पर लेख पड़े हुए हैं किन्तु यहाँ राष्ट्रीय सप्ताह कर शहीदी दिवस मनाने का प्रबन्ध किया जा रहा है। इसलिए तब तक यदि लेख न भेज सका तो कृपया क्षमा कर दीजियेगा। हो सका तो पहला लेख एक सप्ताह तक भेज दूँगा। ‘महारथी’ का अगला अंक कितने दिनों तक छप जायेगा? लेख और फ़ोटो कब तक पहुँच जाने चाहिए? लिखें ज़रूर। जवाब जल्द देकर आभारी बनायें।

निवेदक

भगतसिंह


शहीद भगतसिंह व उनके साथियों के बाकी दस्तावेजों को यूनिकोड फॉर्मेट में आप इस लिंक से पढ़ सकते हैं। 


Bhagat-Singh-sampoorna-uplabhdha-dastavejये लेख राहुल फाउण्डेशन द्वारा प्रकाशित ‘भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़’ से लिया गया है। पुस्तक का परिचय वहीं से साभार – अपने देश और पूरी दुनिया के क्रान्तिकारी साहित्य की ऐतिहासिक विरासत को प्रस्तुत करने के क्रम में राहुल फाउण्डेशन ने भगतसिंह और उनके साथियों के महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों को बड़े पैमाने पर जागरूक नागरिकों और प्रगतिकामी युवाओं तक पहुँचाया है और इसी सोच के तहत, अब भगतसिंह और उनके साथियों के अब तक उपलब्ध सभी दस्तावेज़ों को पहली बार एक साथ प्रकाशित किया गया है।
इक्कीसवीं शताब्दी में भगतसिंह को याद करना और उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का उपक्रम एक विस्मृत क्रान्तिकारी परम्परा का पुन:स्मरण मात्र ही नहीं है। भगतसिंह का चिन्तन परम्परा और परिवर्तन के द्वन्द्व का जीवन्त रूप है और आज, जब नयी क्रान्तिकारी शक्तियों को एक बार फिर नयी समाजवादी क्रान्ति की रणनीति और आम रणकौशल विकसित करना है तो भगतसिंह की विचार-प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों से कुछ बहुमूल्य चीज़ें सीखने को मिलेंगी।
इन विचारों से देश की व्यापक जनता को, विशेषकर उन करोड़ों जागरूक, विद्रोही, सम्भावनासम्पन्न युवाओं को परिचित कराना आवश्यक है जिनके कन्धे पर भविष्य-निर्माण का कठिन ऐतिहासिक दायित्व है। इसी उदेश्य से भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़ों का यह संकलन प्रस्तुत है।
आयरिश क्रान्तिकारी डान ब्रीन की पुस्तक के भगतसिंह द्वारा किये गये अनुवाद और उनकी जेल नोटबुक के साथ ही, भगतसिंह और उनके साथियों और सभी 108 उपलब्ध दस्तावेज़ों को पहली बार एक साथ प्रकाशित किया गया है। इसके बावजूद ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ?’ जैसे कर्इ महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों और जेल नोटबुक का जिस तरह आठवें-नवें दशक में पता चला, उसे देखते हुए, अभी भी कुछ सामग्री यहाँ-वहाँ पड़ी होगी, यह मानने के पर्याप्त कारण मौजूद हैं। इसीलिए इस संकलन को ‘सम्पूर्ण दस्तावेज़’ के बजाय ‘सम्पूर्ण उपलब्ध’ दस्तावेज़ नाम दिया गया है।

व्यापक जनता तक पहूँचाने के लिए राहुल फाउण्डेशन ने इस पुस्तक का मुल्य बेहद कम रखा है (250 रू.)। अगर आप ये पुस्तक खरीदना चाहते हैं तो इस लिंक पर जायें या फिर नीचे दिये गये फोन/ईमेल पर सम्‍पर्क करें।

जनचेतना से पुस्तकें मँगाने का तरीका:

  • जनचेतना पर उपलब्ध पुस्तकों को आप डाक के ज़रिये मँगा सकते हैं ।
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