नौभास और स्कूली निगरानी समिति के नेतृत्व में परीक्षा परिणामों में हुई गड़बडि़यों के ख़िलाफ़ स्कूली छात्राओं और अभिभावकों ने किया दिल्ली सचिवालय पर प्रदर्शन। जनता के दबाव के चलते दिल्ली सरकार ने किया मामले की जाँच करवाने का वादा।

नौभास और स्कूली निगरानी समिति के नेतृत्व में परीक्षा परिणामों में हुई गड़बडि़यों के ख़िलाफ़ स्कूली छात्राओं और अभिभावकों ने किया दिल्ली सचिवालय पर प्रदर्शन।

जनता के दबाव के चलते दिल्ली सरकार ने किया मामले की जाँच करवाने का वादा। 

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर स्थित राजकीय उच्चतम माध्यमिक कन्या विद्याालय, न्यू सभापुर की छात्राओं और अभिभावकों ने नौवीं तथा ग्यारहवीं के परीक्षा परिणामों में हुई गड़बडि़यों के ख़िलाफ़ ‘नौजवान भारत सभा’ तथा ‘स्कूल निगरानी समिति’ के नेतृत्व में आज 11 अप्रैल को दिल्ली सचिवालय पर प्रदर्शन किया। ज्ञात हो कि उक्त विद्यालय में नौवीं और ग्यारहवीं कक्षाओं की 80 प्रतिशत छात्राओं को फेल घोषित कर दिया गया था। जब 1 अप्रैल को इस गड़बड़ी की शिकायत लेकर छात्राएँ स्कूल की प्रिंसिपल के पास पहुँचीं तो उन्होंने कोई ठोस जवाब देने के बजाय स्थानीय थाने को सूचना दे दी। स्कूल में पहुँचकर दिल्ली पुलिस के पुरुष पुलिसकर्मियों ने छात्राओं और उनकी माँओं के साथ मारपीट, धक्कामुक्की तथा बदतमीजी की। पुलिस की ज़्यादतियों का विरोध् कर रहे ‘नौजवान भारत सभा’ और ‘शहीद भगतसिंह पुस्तकालय’ के कार्यकर्ताओं को 4 अप्रैल को पुलिस द्वारा बिना कारण बताये जबरदस्ती हिरासत में ले लिया तथा उन्हें डराया धमकाया उक्त घटना के ख़िलाफ़ स्कूली छात्राओं, नागरिकों, बुद्धिजीवियों, जन संगठनों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 6 अप्रैल को पुलिस मुख्यालय पर भी विरोध् प्रदर्शन किया जहाँ उन्हें दिल्ली पुलिस के वर्तमान पुलिस कमिश्नर श्री आलोक वर्मा द्वारा उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।
इस पूरे मुद्दे को लेकर छात्राएँ और उनके अभिभावक स्थानीय विद्यायक से भी मिले। लेकिन, उन्होंने कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। ‘नौजवान भारत सभा’ के योगेश ने बात रखते हुए कहा कि राजकीय उच्चतम माध्यमिक कन्या विद्यालय, न्यू सभापुर में शिक्षा के लिए तय सरकारी मानकों का सरासर उल्लंघन होता है और शिक्षा निदेशालय चुप बैठा रहता है। उक्त विद्यालय में लगभग दस हजार छात्रा-छात्राएँ नामांकित हैं। छात्रों की संख्या के हिसाब से न ही वहाँ भवन हैं, न डेस्क-बेंच हैं, न शौचालय और न ही पीने के पानी की व्यवस्था है। भवन की उचित व्यवस्था न होने के कारण छात्राओं को जलती धूप में मैदान में बैठना पड़ता है। छात्रों की संख्या का अतिरिक्त दबाव होने के कारण स्कूल को चार शिफ्टों में चलाया जाता है जिसमें नौवीं से लेकर बारहवीं कक्षा तक की छात्राओं को बस दो घण्टे की कक्षा ही दी जाती है। स्कूल में 1ः30 शिक्षक छात्र के अनुपात का भी पालन नहीं किया जाता। एक कक्षा में 90-100 छात्रों के दाखिले लिये जाते हैं। आज जो स्थिति उस स्कूल की है उसे लेकर पूरी शिक्षा व्यवस्था और सरकार पर सवाल उठना लाजमी है, इसीलिए हम दिल्ली सरकार के वर्तमान शिक्षा मंत्राी श्रीमान मनीष सिसोदिया तक अपनी बात लेकर आये हैं। और आज यह सवाल दिल्ली के हर सरकारी स्कूल का सवाल है क्योंकि पूरी दिल्ली भर में कमोबेश यही हालत है।
‘स्कूल निगरानी समिति’ के शाममूर्ति ने कहा कि हमें अपने संघर्ष को उत्तर-पत्रों की पुनःजाँच तक ही सीमित नहीं करना चाहिए बल्कि सरकार से यह माँग भी करनी चाहिए कि पूरे देशभर में एकसमान स्कूल व्यवस्था (यूनिपफाॅर्म स्कूल सिस्टम) लागू किया जाय। सरकारी स्कूलों में देश की ग़रीब और मध्यवर्गीय आबादी के बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन, इन स्कूलों की हालत ख़स्ता है। स्पष्ट तौर पर इसके लिए हमारी सरकारें ही जिम्मेदार हैं। आज शिक्षा के बाजारीकरण ने शिक्षा को पूरी तरह एक बिकाऊ माल बना दिया है। इसका सबसे ज़्यादा असर हमारी स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर ही पड़ा है। आज ज़रूरत इस बात की है कि एकजुट होकर सरकार तक यह बात पहुँचायी जाय कि शिक्षा हमारा बुनियादी अधिकार है और सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बच्चे को बेहतर शिक्षा मिले।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्राओं तथा अभिभावकों ने शिरकत की तथा माँगों से सम्बन्ध्ति ज्ञापन शिक्षा मंत्राी को सौंपा जिसमें उत्तर-पुस्तिकाओं की पुनः जाँच की माँग, प्रिंसिपल की बर्खास्तगी की माँग सहित अवरचनागत सुविधओं की बेहतरी की माँगें शामिल है। शिक्षा मंत्राी मनीष सिसोदिया के डिप्टी सेक्रेटरी ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार इस पूरी घटना की जांच करवाएगी और साथ ही उत्तर-पुस्तिकाओं की पुनः जाँच कराने का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम में क्रान्तिकारी गीतों की भी प्रस्तुति की गयी।

Save school campaign

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