भगतसिंह – जयदेव के नाम एक और पत्र

जयदेव के नाम एक और पत्र

28 मई, 1930

प्रिय भाई जयदेव,

आज फिर तुम्हें कुछ तकलीफ़ देने के लिए मैं यह ख़त लिख रहा हूँ, उम्मीद है कि तुम बुरा नहीं मानोगे। कृपया मेरे लिए पैरों का फ़लीट जूता भेजने का प्रबन्ध करना। 9-10 नम्बर का चल जायेगा। चप्पल से बहुत बेआरामी है। कृपया इन्हें शुक्रवार या शनिवार को कुलबीर के हाथ भेजने की कोशिश करना, जब वह हमारी मुलाक़ात के लिए आयेगा। सच में मैं बहुत उदास हूँ कि मुझे तुम्हारे साथ अभी तक मुलाक़ात की इजाज़त नहीं मिली है। यदि मुक़दमे में यह गतिरोध न आया होता तो मैंने अधिकारियों से तुम्हारे साथ मुलाक़ात की इजाज़त के लिए बार-बार आग्रह किया होता। जो भी हो, इस समस्या के सुलझते ही मुलाक़ात की इजाज़त की फिर कोशिश करूँगा। मुझे उम्मीद है कि तुम जूते अवश्य ही और बिना देर किए भेज दोगे। इन दिनों मेरे पास एक ही किताब है और वह भी बहुत शुष्क। देखना अगर हाल में प्रकाशित कुछ दिलचस्प उपन्यास भेज सको। कृपया दोस्तों को मेरी याद पहुँचाना।

सच्ची भावनाओं के साथ तुम्हारा

भगतसिंह

तारीख़ 26/5/30

लाहौर डाकखाने की मोहर 28/5/30

पता – जयदेव प्रसाद गुप्त द्वारा स. किशन सिंह

ब्रैडले हॉल, लाहौर


शहीद भगतसिंह व उनके साथियों के बाकी दस्तावेजों को यूनिकोड फॉर्मेट में आप इस लिंक से पढ़ सकते हैं। 


Bhagat-Singh-sampoorna-uplabhdha-dastavejये लेख राहुल फाउण्डेशन द्वारा प्रकाशित ‘भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़’ से लिया गया है। पुस्तक का परिचय वहीं से साभार – अपने देश और पूरी दुनिया के क्रान्तिकारी साहित्य की ऐतिहासिक विरासत को प्रस्तुत करने के क्रम में राहुल फाउण्डेशन ने भगतसिंह और उनके साथियों के महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों को बड़े पैमाने पर जागरूक नागरिकों और प्रगतिकामी युवाओं तक पहुँचाया है और इसी सोच के तहत, अब भगतसिंह और उनके साथियों के अब तक उपलब्ध सभी दस्तावेज़ों को पहली बार एक साथ प्रकाशित किया गया है।
इक्कीसवीं शताब्दी में भगतसिंह को याद करना और उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का उपक्रम एक विस्मृत क्रान्तिकारी परम्परा का पुन:स्मरण मात्र ही नहीं है। भगतसिंह का चिन्तन परम्परा और परिवर्तन के द्वन्द्व का जीवन्त रूप है और आज, जब नयी क्रान्तिकारी शक्तियों को एक बार फिर नयी समाजवादी क्रान्ति की रणनीति और आम रणकौशल विकसित करना है तो भगतसिंह की विचार-प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों से कुछ बहुमूल्य चीज़ें सीखने को मिलेंगी।
इन विचारों से देश की व्यापक जनता को, विशेषकर उन करोड़ों जागरूक, विद्रोही, सम्भावनासम्पन्न युवाओं को परिचित कराना आवश्यक है जिनके कन्धे पर भविष्य-निर्माण का कठिन ऐतिहासिक दायित्व है। इसी उदेश्य से भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़ों का यह संकलन प्रस्तुत है।
आयरिश क्रान्तिकारी डान ब्रीन की पुस्तक के भगतसिंह द्वारा किये गये अनुवाद और उनकी जेल नोटबुक के साथ ही, भगतसिंह और उनके साथियों और सभी 108 उपलब्ध दस्तावेज़ों को पहली बार एक साथ प्रकाशित किया गया है। इसके बावजूद ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ?’ जैसे कर्इ महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों और जेल नोटबुक का जिस तरह आठवें-नवें दशक में पता चला, उसे देखते हुए, अभी भी कुछ सामग्री यहाँ-वहाँ पड़ी होगी, यह मानने के पर्याप्त कारण मौजूद हैं। इसीलिए इस संकलन को ‘सम्पूर्ण दस्तावेज़’ के बजाय ‘सम्पूर्ण उपलब्ध’ दस्तावेज़ नाम दिया गया है।

व्यापक जनता तक पहूँचाने के लिए राहुल फाउण्डेशन ने इस पुस्तक का मुल्य बेहद कम रखा है (250 रू.)। अगर आप ये पुस्तक खरीदना चाहते हैं तो इस लिंक पर जायें या फिर नीचे दिये गये फोन/ईमेल पर सम्‍पर्क करें।

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